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Monday, 4 May 2015

दृढ़ बने रहो और जीवन की दौड़ जीत लो

By flipkart   Posted at  23:34   MOTIVATIONAL STORIES No comments


दृढ़ बने रहो और जीवन की दौड़ जीत लो ...
कुछ वर्ष पूर्व सीटल के विशेष ओलम्पिक खेलों की एक घटना है। मानसिक एवं शारीरिक रूप से असक्षम युवाओं
की 100 मीटर की दौड़ के आयोजन का समय आ गया था। मानसिक एवं शारीरिक रूप से असक्षम प्रतिभागी
बन्दूक की गोली चलने की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही गोली चली, सभी प्रतिद्वन्दी प्रारंभिक रेखा से भागे और जीतने की प्रबल इच्छा को लेकर आगे बढ़ने लगे। लेकिन एक छोटा लड़का लड़खड़ा कर शुरू में ही गिर गया और रोने लगा। बाकी आठ प्रतिभागियों ने उसके रोने की आवाज़ सुनी और उन आठों ने पीछे मुड़कर देखा।और फिर वह आठों के आठों वापस लौटे और उस बालक के पास पहुंचे। एक बालिका जो "डाउन्स सिन्ड्रोम" नामक बीमारी से ग्रसित होने के कारण मानसिक एवं शारीरिक रूप से असामान्य थी, झुकी और उसने उस छोटे से बालक को प्यार से चूमा और बोली, " अरे कोई बात नहीं , अब तुम बिल्कुल ठीक से दौड़ोगे ।"और इसके बाद जो भी हुआ उसे देखकर स्टेडियम में बैठे सभी दर्शकों ने दांतों तले उंगली दबा ली। इसके बाद नौ के नौ प्रतिभागियों ने एक दूसरे के हाथ पकड़ कर एक साथ भागना शुरू किया और सबने एक साथ 100 मीटर की अन्तिम रेखा पार की।

इस दौड़ के समाप्त होने के पश्चात स्टेडियम में उपस्थित अपार जनसमूह खड़ा हो गया और सबने मिलकर काफ़ी देर तक तालियाँ बजा कर इन शारीरिक एवं मानसिक रूप से असामान्य प्रतिभागियों का मनोबल बढाया।
जो लोग उस समय वहां उपस्थित थे वे आज तक अन्य लोगों को यह कहानी बड़े गर्व से सुनते हैं। क्यों ? क्योंकि मन ही मन वह जानते हैं की हमारे जीवन में स्वयं जीतने से अधिक महत्वपूर्ण है जीतने में अन्य लोगों की मदद करना, चाहे ऐसा करने में उन्हें अपनी गति कुछ कम ही करनी पड़े। चाहे ऐसा करने में उन्हें अपना मार्ग ही कुछ क्यों न बदलना पड़े। " क्या दूसरी मोमबत्ती जलाने के बाद पहली मोमबत्ती की रौशनी धीमी पड़ जाती है ? "नहीं न" । क्या दूसरी मोमबत्ती को बुझा देने से पहली मोमबत्ती ज्यादा तेज़ी से चमकने लगती है ? "
 

अन्तरात्मा से आती हुई आवाज़ सुनो

By flipkart   Posted at  23:20   NEWS No comments


अंतरात्मा की आवाज - अन्तरात्मा से आती हुई आवाज़ सुनो

एक दिन की घटना है । एक छोटी सी लड़की फटे पुराने कपड़ो में एक सड़क के कोने पर खड़ी भीख मांग रही थी । न तो उसके पास खाने को था, न ही पहनने के लिए ठीक ठाक कपड़े थे और न ही उसे शिक्षा प्राप्त हो पा रही थी ।
वह बहुत ही गन्दी बनी हुई थी, कई दिनों से नहाई नहीं थी और उसके बाल भी बिखरे हुए थे । तभी एक अच्छे घर का संभ्रांत युवा अपनी कार में उस चौराहे से निकला और उसने उस लड़की को देखते हुए भी अनदेखा कर दिया । अंततः वह अपने आलीशान घर में  पहुंचा जहाँ सुख  सुविधा के सभी साधन उपलब्ध थे । तमाम नौकर चाकर थे, भरा पूरा सुखी परिवार था ।

जब वह रात्रि का भोजन करने के लिए अनेक व्यंजनों से भरी हुई मेज पर बैठा तो अनायास ही उस अनाथ भिखारी बच्ची की तस्वीर उसकी आँखों के सामने आ गयी । उस
बिखरे बालों वाली फटे पुराने कपड़ों में छोटी सी भूखी बच्ची की याद आते ही वह व्यक्ति ईशवर पर बहुत नाराज़ हुआ । उसने ईश्वर को ऐसी व्यवस्था के लिए बहुत धिक्कारा कि उसके पास तो सारे सुख साधन मौजूद थे और एक निर्दोष लड़की के पास न खाने को था और न ही वह शिक्षा प्राप्त कर पा रही थी । अंततः उसने ईश्वर को कोसा,  " हे ईश्वर आप ऐसा कैसे होने दे रहे हैं ? आप इस लड़की की मदद करने के लिए कुछ करते क्यों नहीं  ?" इस प्रकार बोल कर वह खाने की मेज़ पर ही आंखें बंद करके बैठा था ।

तभी  उसने अपनी अन्तरात्मा से आती हुई आवाज़ सुनी जो कि ईश्वरीय ही थी । ईश्वर  ने कहा " मैं बहुत कुछ करता हूँ और ऐसी परिस्तिथियों को बदलने के लिए मैंने बहुत कुछ किया है । मैंने तुम्हें बनाया है ।" जैसे ही उस व्यक्ति को यह एहसास हुआ कि ईश्वर उस गरीब बालिका का उद्वार उसी के द्वारा करना चाहता है, वह बिना भोजन किये मेज़ से उठा और वापस उसी स्थान पर पहुंचा, जहाँ वह गरीब लड़कीखड़ी भीख मांग रही थी । वहां पहुँच कर उसने उस लड़की को कपडे दिए और भविष्य में उसे पढ़ाने लिखाने और एक सम्मानित नागरिक बनाने का पूरा खर्चा उठाया । 

तो आइए हम सब मिलकर इन बच्चों की मदद करते हे






Wednesday, 29 April 2015

उत्साह का चमत्कार - The miracle of enthusiasm

By flipkart   Posted at  23:58   MOTIVATIONAL STORIES No comments


उत्साह का चमत्कार
 एक महिला कैंसर से बुरी तरह पीड़ित थी। डॉक्टरों ने उसे बता दिया था कि उसके पास जीवन के सिर्फ 6 महीने ही बचे हैं। इस दौरान उसे महंगा इलाज कराना होगा। महिला के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। जीवन के मात्र छह महीने बाकी देखकर उसने तय किया कि वह एक-एक क्षण का सदुपयोग करेगी। उसने गरीबों और निराश्रितों की सेवा शुरू कर दी। वह सारा दिन गरीब बच्चों के चेहरों पर खुशियां लाने का प्रयास करती। उनके साथ हंसती-खेलती। उत्साह में उसके दिन तेजी से बीत रहे थे।

एक दिन महिला ने कैंसर पीड़ितों की सेवा हेतु देशवासियों से आर्थिक सहायता की अपील की। उसने जन-जन तक कैंसर पीड़ितों की हालत बयां करने के लिए समाचार पत्र, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन आदि का सहारा लिया। लोगों ने तुरंत पैसा देना शुरू भी कर दिया। दो-तीन महीने में ही इतना धन एकत्र हो गया कि उनसे एडंवास तकनीक की तीन-चार मशीनें आ गईं और एक कैंसर अस्पताल का निर्माण भी होने लगा। अपनी सफलता देखकर महिला का उत्साह चरम पर था। उसे दिल से खुशी थी कि उसके प्रयास सफल हो रहे थे।

महिला इन कार्यों में इतनी व्यस्त रही कि उसे इस बात का ध्यान ही न रहा कि वह खुद कैंसर पीड़ित है। एक साल बाद उसे ध्यान आया कि डॉक्टरों ने तो उसके जीवन के छह माह ही बाकी बताए थे। लेकिन अब वह पहले से अधिक स्वस्थ महसूस कर रही थी। जांच में पाया गया कि उसका कैंसर गायब हो चुका था। यह देख डॉक्टर दंग रह गए। महिला मुस्करा कर बोली, 'यह कैंसर उत्साह और सेवा भावना से डर कर भाग गया है।' सभी उसकी बात से सहमत थे।

संकल्प की शक्ति - Hindi motivet kahani

By flipkart   Posted at  22:50   MOTIVATIONAL STORIES No comments


बहुत समय पहले की बात है. जापान में एक युवा समुराई रहता था जो अपनी मंगेतर से बहुत प्रेम करता था. एक दिन जब उसकी मंगेतर जंगल से गुज़र रही थी, तब एक आदमखोर बाघ ने उसपर प्राणघातक हमला कर दिया. समुराई ने अपनी प्रेयसी को बचाने के भरसक प्रयास किए उसकी मृत्यु हो गई.
दुःख में आकंठ डूबे समुराई ने यह संकल्प लिया कि वह अपनी प्रिया की असमय मृत्यु का प्रतिशोध लेगा और उस बाघ को खोजकर खत्म कर देगा.

इस प्रकार समुराई अपने धनुष-बाण लेकर गहरे जंगल में चला गया और बहुत लंबे समय तक उस बाघ की खोज करता रहा. एक दिन उसे वह एक बाघ कुछ दूरी पर सोता दिखाई दिया. समुराई उसे देखकर समझ गया कि उसी बाघ ने उसकी प्रेयसी के प्राण लिए थे.

उसने अपना धनुष उठाया और निशाना लगाकर बाण छोड़ दिया. बाण बिजली की गति से छूटकर बाघ के शरीर को भेद गया. प्रत्यंचा पर दूसरा बाण चढ़ाकर वह बाघ की मृत्यु सुनिश्चित करने के लिए सतर्कतापूर्वक उसकी ओर बढ़ा… लेकिन वह यह देखकर अचंभित था कि उसके तीर ने किसी बाघ को नहीं बल्कि उसके जैसे दिखनेवाले धारीदार पत्थर को भेद दिया था!

इस घटना का बाद गांव में हर ओर उसकी धनुर्विद्या की चर्चा थी… कि उसने किस तरह एक पत्थर को तीर से भेद दिया, और लोग उसकी परीक्षा लेना चाहते थे.

लेकिन अनेक बार प्रयास करने के बाद भी समुराई के तीर चट्टानों और पत्थरों से टकराकर टूटते रहे. वह उन्हें भेदने का करिश्मा दुहरा नहीं सका.

क्योंकि इस बार समुराई जानता था कि वह पत्थर पर तीर चला रहा है. विगत में उसका संकल्प इतना गहन था कि वह वास्तव में पत्थर को तीर से भेद सका. परिस्तिथियों के बदलते ही उसका अद्भुत कौशल लुप्त हो गया.


Tuesday, 28 April 2015

प्रयास कभी भी ना छोड़े बेस्ट हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

By flipkart   Posted at  22:44   MOTIVATIONAL STORIES No comments
प्रयास कभी भी ना छोड़े बेस्ट हिंदी मोटिवेशनल स्टोरी

एक लड़की कार चला रही थी और पास में उसके पिताजी बैठे थे.
राह में एक भयंकर तूफ़ान आया और लड़की ने पिता से पूछा -- अब हम
क्या करें?
पिता ने जवाब दिया -- कार चलाते रहो.
तूफ़ान में कार चलाना बहुत ही मुश्किल हो रहा था,  तूफ़ान और भयंकर
होता जा रहा था.
अब मैं क्या करू ? -- लड़की ने पुनः पूछा.
कार चलाते रहो. -- पिता ने पुनः कहा.

थोड़ा आगे जाने पर लड़की ने देखा की राह में कई वाहन तूफ़ान
की वजह से रुके हुए थे......
उसने फिर अपने पिता से कहा -- मुझे कार रोक देनी चाहिए.......
मैं मुश्किल से देख पा रही हूँ.......
यह भयंकर है और प्रत्येक ने अपना वाहन रोक
दिया है.......

उसके पिता ने फिर निर्देशित किया -- कार रोकना नहीं. बस चलाते रहो....
अब तूफ़ान ने बहुत ही भयंकर रूप धारण कर लिया था किन्तु लड़की ने कार चलाना नहीं रोका..........
और अचानक ही उसने देखा कि कुछ साफ़ दिखने
लगा है.........
कुछ किलो मीटर आगे जाने के पश्चात लड़की ने देखा कि तूफ़ान थम
गया और सूर्य निकल आया......
अब उसके पिता ने कहा -- अब तुम कार रोक सकती हो और बाहर आ
सकती हो........
लड़की ने पूछा -- पर अब क्यों?
पिता ने कहा -- जब तुम बाहर आओगी तो देखोगी कि जो राह में
रुक गए थे, वे अभी भी तूफ़ान में फंसे हुए हैं......
चूँकि तुमने कार चलाने का प्रयत्न नहीं छोड़ा, तुम तूफ़ान के बाहर हो......

यह किस्सा उन लोगों के लिए एक प्रमाण है जो कठिन समय से गुजर रहे
हैं.........
मजबूत से मजबूत इंसान भी प्रयास छोड़ देते हैं........
किन्तु प्रयास कभी भी छोड़ना नहीं चाहिए.......
निश्चित ही जिन्दगी का कठिन समय गुजर जायेंगे और सुबह के सूर्य
की भांति चमक आपके जीवन में पुनः आयेगी.......!!!!!

जिन्दगी में कभी हार मत मानो - Do not ever give up in life ...

By flipkart   Posted at  00:49   MOTIVATIONAL STORIES No comments


बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था . उसके पास बहुत सारे जानवर थे , उन्ही में से एक गधा भी था . एक दिन वह चरते चरते खेत में बने एक पुराने सूखे हुए कुएं के पास जा पहुचा और अचानक ही उसमे फिसल कर गिर गया . गिरते ही उसने जो...र -जोर से चिल्लाना शुरू किया -” ढेंचू-ढेंचू ….ढेंचू-ढेंचू….”उसकी आवाज़ सुन कर खेत में काम कर रहे लोग कुएं के पास पहुचे, किसान को भी बुलाया गया .किसान ने स्थिति का जायजा लिया , उसे गधे पर दया तो आई लेकिन उसने मन में सोचा कि इस बूढ़े गधे को बचाने से कोई लाभ नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत लगेगी और साथ ही कुएं की भी कोई ज़रुरत नहीं है , फिर उसने बाकी लोगों से कहा , “मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी तरह इस गधे को बचा सकते हैं अतः आप सभी अपने-अपने काम पर लग जाइए, यहाँ समय गंवाने से कोई लाभ नहीं.”और ऐसा कह कर वह आगे बढ़ने को ही था की एक मजदूर बोला,” मालिक , इस गधे ने सालों तक आपकी सेवा की है , इसे इस तरह तड़प-तड़प के मरने देने से अच्छा होगा की हम उसे इसी कुएं में दफना दें .”किसान ने भी सहमती जताते हुए उसकी हाँ में हाँ मिला दी.” चलो हम सब मिल कर इस कुएं में मिटटी डालना शुरू करते हैं और गधे को यहीं दफना देते हैं”, किसान बोला. गधा ये सब सुन रहा था और अब वह और भी डर गया , उसे लगा कि कहाँ उसके मालिक को उसे बचाना चाहिए तो उलटे वो लोग उसे दफनाने की योजना बना रहे हैं . यह सब सुन कर वह भयभीत हो गया , पर उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान् को याद कर वहां से निकलने के बारे में सोचने लगा ….अभी वह अपने विचारों में खोया ही था कि अचानक उसके ऊपर मिटटी की बारिश होने लगी, गधे ने मन ही मन सोचा कि भले कुछ हो जाए वह अपना प्रयास नहीं छोड़ेगा और आसानी से हार नहीं मानेगा। और फिर वह पूरी ताकत से उछाल मारने लगा .किसान ने भी औरों की तरह मिटटी से भरी एक बोरी कुएं में झोंक दी और उसमे झाँकने लगा , उसने देखा की जैसे ही मिटटी गधे के ऊपर पड़ती वो उसे अपने शरीर से झटकता और उछल कर उसके ऊपर चढ़ जाता .जब भी उसपे मिटटी डाली जाती वह यही करता ….झटकता और ऊपर चढ़ जाता …. झटकता और ऊपर चढ़ जाता ….किसान भी समझ चुका था कि अगर वह यूँ ही मिटटी डलवाता रहा तो गधे की जान बच सकती है .फिर क्या था वह मिटटी डलवाता गया और देखते-देखते गधा कुएं के मुहाने तक पहुँच गया, और अंत में कूद कर बाहर आ गया.मित्रों, हमारी ज़िन्दगी भी इसी तरह होती है , हम चाहे जितनी भी सावधानी बरतें कभी न कभी मुसीबत रुपी गड्ढे में गिर ही जाते हैं .पर गिरना प्रमुख नहीं है,प्रमुख है संभलना . बहुत से लोग बिना प्रयास किये ही हार मान लेते हैं , पर जो प्रयास करते हैं भगवान् भी किसी न किसी रूप में उनके लिए मदद भेज देता है।

Monday, 27 April 2015

जो आज करोगे वो 'आपका कल' बन सामने होगा

By flipkart   Posted at  23:58   MOTIVATIONAL STORIES No comments


क्या गुजरी होगी उस बुढ़ी माँ के दिल पर जब उसकी बहु ने कहा -:
"माँ जी, आप अपना खाना बना लेना, मुझे और इन्हें आज एक पार्टी में जाना है ...!!"

बुढ़ी माँ ने कहा -: "बेटी मुझे गैस चुल्हा चलाना नहीं आता ...!!"

तो बेटे ने कहा -: "माँ, पास वाले मंदिर में आज भंडारा है , तुम वहाँ चली जाओ ना खाना बनाने की कोई नौबत ही नहीं आयेगी....!!!"

माँ चुपचाप अपनी चप्पल पहन कर मंदिर की ओर हो चली.....
यह पुरा वाक्या 10 साल का बेटा रोहन सुन रहा था ।

पार्टी में जाते वक्त रास्ते में रोहन ने अपने पापा से कहा -:

"पापा, मैं जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ना तब मैं भी अपना घर किसी मंदिर के पास
ही बनाऊंगा ....!!!

माँ ने उत्सुकतावश पुछा -: क्यों बेटा ?
रोहन ने जो जवाब दिया उसे सुनकर उस बेटे और बहु का सिर शर्म से नीचे झुक गया जो अपनी माँ को मंदिर में छोड़ आए थे.....

रोहन ने कहा -: क्योंकि माँ, जब मुझे भी किसी दिन ऐसी ही किसी पार्टी में जाना होगा
तब तुम भी तो किसी मंदिर में भंडारे में खाना खाने जाओगी ना और मैं नहीं चाहता कि तुम्हें कहीं दूर के मंदिर में जाना पड़े....!



Monday, 20 April 2015

क्या आपकी विल पॉवर स्ट्राँग है? जानने के क्विज में हिस्सा लीजिए

By flipkart   Posted at  01:03   MOTIVATIONAL STORIES No comments
क्या आपकी विल पॉवर स्ट्राँग है?
कहते हैं ईश्वर उन्हीं की मदद करता है, जो खुद अपनी मदद करते हैं। जिनमें दृढ़ इच्छाशक्ति, संकल्प और कुछ कर गुजरने का जज्बा होता है। इन सब खूबियों और एहसासों को हम इच्छाशक्ति यानी विल पॉवर के रूप में व्यक्त कर सकते हैं। तो क्या आप अपने आपको इच्छाशक्ति वाले मानते हैं? यहाँ दी जा रही क्विज में हिस्सा लीजिए। खुद ही पता चल जाएगा कि आपकी विल पॉवर का लेवल क्या है? इच्छाशक्ति ही अच्छी सेहत का मूल आधार है।

1. किसी से बहस होने पर उसका नतीजा क्या निकलता है?
(क) आप जीतते हैं
(ख) आप हारते हैं
(ग) आप मतभेद को स्वीकार कर लेते हैं।

2. आपका पसंदीदा रंग कौन-सा है?
(क) लाल
(ख) नीला
(ग) पीला।

3. आपके जीवन में जो महत्वपूर्ण बदलाव आया है, उसका श्रेय आप किसे देते हैं?
(क) अपने जीवनसाथी या अपने माता-पिता को
(ख) अपने आपको
(ग) किस्मत को।

4. आपकी सेहत कैसी है?
(क) अच्छी है
(ख) ठीक नहीं रहती
(ग) कुछ सुधारने का मन कभी-कभी करता है।

5. आपका वजन कितना है?
(क) 70 किलो
(ख) 75 किलो
(ग) कद के हिसाब से ठीक है।

6. आप एक पार्टी में गए हैं। आपने छककर खा लिया है, फिर भी दोस्त कुछ और खाने के लिए दबाव डाल रहे हैं-
(क) उनके कहने पर रख तो लेते हैं, लेकिन बाद में छोड़ देते हैं
(ख) आपका मन है, मना कर दिया तो कर दिया
(ग) खाकर उल्टी कर दी।

7. अपनी खुराक से ज्यादा आप कब-कब खाते हैं?
(क) अक्सर
(ख) कभी-कभी
(ग) कभी नहीं।

8. कोई बुरी आदत या लत छोड़ने का प्रयास आपने कितनी बार किया है?
(क) असफलता के साथ कई बार
(ख) अच्छी चीजें भी कहीं छोड़ी जाती हैं
(ग) जिस दिन तय किया था उसी दिन छोड़ दी थी।

9. बाद में पछताने वाले काम आप कितनी बार करते हैं?
(क) अक्सर
(ख) कभी-कभी
(ग) कभी नहीं।




अगर आपका स्कोर 20 से अधिक है तो आपमें गजब का सेल्फ कंट्रोल और विल पॉवर है। इससे आप दूसरे लोगों को प्रभावित करते हैं और आपको अपने काम में भी सफलता हासिल हो जाती है। आप अपने इस काम को और आगे बढ़ाएँ।

अगर आपका स्कोर 10 से 15 के बीच है तो आप अमूमन अपनी मर्जी से काम करते हैं, लेकिन दूसरे लोगों की बातों से भी प्रभावित हो जाते हैं। हालाँकि आपका दिल आपके दिमाग पर राज करता है, लेकिन कुछ गलत होने पर भी आपको पछतावा नहीं होता। आपको चाहिए कि अपनी इच्छाशक्ति यानी विल पॉवर को कुछ और मजबूत करें।

अगर आपका स्कोर 0 से 9 के बीच है तो आप अपनी मर्जी से कुछ नहीं करते। जो भी काम दूसरे लोग कहते हैं उसे करते हैं। साथ ही आपको त्वरित आनंद में ही मजा आता है। आपको इस बात की जरा भी परवाह नहीं है कि कल आपके पास कुछ होगा या नहीं या दूसरे लोग आपके बारे में क्या कहेंगे। कहने का अर्थ है कि आपका न अपने ऊपर कंट्रोल है और न ही विल पॉवर। -

Sunday, 19 April 2015

आईआईटी में फेल बना आईएएस टॉपर

By flipkart   Posted at  22:50   MOTIVATIONAL STORIES No comments
आईआईटी में फेल… आईआईएम में एडमिशन मांगने गए तो भगाया...एक सप्ताह पहले शादी… पुलिस अफसर बनने की ट्रेनिंग… और यूपीएससी में टॉपर… अमूमन मुंबईया मसाला फिल्मों की कहानियों का नायक कुछ इसी तरह… नाटकीय उतार-चढ़ाव के बीच और हर जगह हारने के बाद… अंत में विजयी होता हैं, क्योंकि दर्शकों की डिमांड कुछ ऐसी ही होती है… वह अपने नायक को अंत में जीतते हुए देखना चाहते थे… रील लाइफ में ऐसी सक्सेस स्टोरी की लंबी फेहरिस्त है… लेकिन रियल लाइफ में कुछ ऐसे ही कर दिखाया है… गौरव अग्रवाल ने…। गौरव अग्रवाल की सफलता कहानी को जानने के लिए हमे पीछे चलना होगा… जिसे फिल्मों में फ्लेश बैक कहा जाता है।

गौरव अग्रवाल पढ़ने में बचपन से ही बेहद होशियार थे। उम्र बढ़ती गई और साथ ही बढ़ती गई काबिलियत। फिर बारी आई आईआईटी की। देशभर में 45वीं रैंक हासिल करने के बाद गौरव अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर में दाखिल लिया। बस यहीं से गौरव की उड़ान थम गई।

किसी और ने नहीं बल्कि खुद के ईगो ने उनके पर कतर दिए। आईआईटी में दाखिले के बाद गौरव में गुरूर आ गया और वे खुद को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ समझने लगे। हालांकि, यह ईगो ज्यादा समय तक नहीं टिका। पढ़ाई से मन दूर हुआ और नतीजों में यह नजर आने लगा। गौरव अग्रवाल फेल होने लगे। देश का टॉपर स्टूडेंट अति आत्मविश्वास का शिकार होने लगा। जिसे वे खुद विनाश काले विपरीत बुद्धि की संज्ञा देते हैं।

जो डिग्री चार साल में पूरी होना थी गौरव उसमें पिछड़ गए। उन्हें फेल होने की वजह से डिग्री हासिल करने में ज्यादा वक्त लगा। इसके बाद उनके पास कोई जॉब नहीं था। आईआईएम में प्रवेश के लिए वह जहां भी गए, उनका पुराना रिकॉर्ड देखकर उन्हें भगा दिया गया। सब दूर से केवल और केवल निराशा ही थी। इस बीच किस्मत ने थोड़ा साथ दिया।

गौरव को आईआईएम लखनऊ से मौका मिला। इसके बाद गौरव ने पीछे मूड़कर नहीं देखा। उन्हें मेहनत के मायने समझ में आ गए थे। वे ज्यादा फोकस हो गए। करियर के प्रति ज्यादा सतर्क भी। नतीजा यह रहा कि आईआईएम में गोल्ड मेडल हासिल हुआ। हांगकांग में बिजनेस बैंकर की नौकरी मिली।

ऐसे मनवाएं अपनी बात...

By flipkart   Posted at  22:46   MOTIVATIONAL STORIES No comments
लोगों को अपनी समझ से अवगत कराने और उन्हें अपनी बात से सहमत कराने का गुण सफलता प्राप्त करने का एक मूल मंत्र है। किसी को अपनी बात से राजी करने और उसे परेशान करने में एक बारीक सा फर्क है। लोगों को अपने विचार समझा पाना वाकई एक ‍कठिन काम है।

इसमें आपकी जरा सी एक चूक उस व्यक्ति को परेशान कर सकती है और वह आप पर झुंझला सकता है। नीचे लिखे कुछ आसान से टिप्स अपनाकर आप आसानी से लोगों को अपनी बात से सहमत कर सकते हैं।

1. पहले से करें तैयारी : सबसे पहले आप अपने विचारों और बातें को अच्छी तरह समझ लीजिए मसलन अगर आप किसी को इस बात से सहमत करना चाहते हैं कि एफिल टॉवर, स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से ज्यादा लंबा है तब इससे संबंधित सारे आंकड़े पता करें सिर्फ अंदाजा न लगाएं।

2. फील्ड को अच्छी तरह जानें : कुछ मामलों में आपको आंकड़ों से कहीं ज्यादा जानने की जरूरत रहती है। जैसे कि यदि आप यह साबित करना चाहते हैं कि स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी, एफिल टॉवर से ज्यादा सुंदर है तब इसके लिए आपको आकंड़ों के साथ-साथ उनके वास्तु-कला और सौंदर्य-शास्त्र की सारी जानकारी होना जाहिए जिससे आप अपनी बात को प्रभावी रूप से कह सकें।

इसी तरह यदि आप किसी कार को बेचना चाहते हैं तो आपको उस कार के साथ-साथ उसकी प्रतिस्पर्धी सारी कारों की संपूर्ण जानकारी होनी आवश्यक है।
3. नम्रतापूर्वक अपनी बात कहें : जहां तक संभव हो आई कॉनटेक्ट बनाए रखें, आपसी सम्मान की भावना बनाए रखें। ‍अगर किसी व्यक्ति को ऐसा लगता है कि आप उसका सम्मान नहीं करते तब आप उसे कभी अपनी बात से सहमत नहीं करा सकते। इसलिए अपनी बातों को नम्रतापूर्वक कहें।
4. भरोसा हासिल करें : लोगों को अपनी बात से सहमत कराने के लिए जरूरी है उनका विश्वास जीतना, उन्हें भरोसा दिलाना कि जो आप कह रहे हैं वह सही है। इसके लिए जरूरी है कि आप विषय से संबं‍धित सारी जानकारी एकत्रित कर लें।

5. ध्यान से सुनें : जिस व्यक्ति को आप सहमत करना चाह रहे हैं, उनकी बातों को भी सुनें, उनके ‍विचारों को भी समझें। उन्हें रियल फेक्ट्स के साथ उनके सवालों के जबाब दें।

6. संकेतों पर ध्यान दें : नॉन-वर्बल फीडबैक जैसे बात को सुनकर सिर हिलाने के संकेतों पर भी ध्यान दें।

7. अडिग रहें : अपने विश्वास पर अडिग रहें। दूसरों के विश्वास की कद्र करें। उन्हें विस्तारपूर्वक बताएं कि आपका यकीन आपके लिए इतना अहम क्यों हैं।

8. सरल अंदाज : अपनी बात को इस अंदाज में रखें कि लोगों को उसे समझने में आसानी हो।

9. फॉलो-अप जरूरी : बातचीत के बाद हमेशा फॉलो-अप लें। लोगों से सवाल करें ताकि आप जान सकें कि वे आपकी बात को पूरी तरह समझे हैं या नहीं।

परमात्मा और किसान

By flipkart   Posted at  01:23   MOTIVATIONAL STORIES No comments
परमात्मा और किसान 
एक बार एक  किसान परमात्मा से बड़ा नाराज हो गया ! कभी बाढ़ आ जाये, कभी सूखा पड़ जाए, कभी धूप बहुत तेज हो जाए तो कभी ओले पड़ जाये! हर बार कुछ ना कुछ कारण से उसकी फसल थोड़ी ख़राब हो जाये! एक  दिन बड़ा तंग आ कर उसने परमात्मा से कहा ,देखिये प्रभु,आप परमात्मा हैं , लेकिन लगता है आपको खेती बाड़ी की ज्यादा जानकारी नहीं है ,एक प्रार्थना है कि एक साल मुझे मौका दीजिये , जैसा मै चाहू वैसा मौसम हो,फिर आप देखना मै कैसे अन्न के भण्डार भर दूंगा! परमात्मा मुस्कुराये और कहा ठीक है, जैसा तुम कहोगे वैसा ही मौसम  दूंगा, मै दखल नहीं करूँगा!

किसान ने गेहूं की फ़सल बोई ,जब धूप  चाही ,तब धूप  मिली, जब पानी तब पानी ! तेज धूप, ओले,बाढ़ ,आंधी तो उसने आने ही नहीं दी, समय के साथ फसल बढ़ी और किसान की ख़ुशी भी,क्योंकि ऐसी फसल तो आज तक नहीं हुई  थी !  किसान ने मन ही मन सोचा अब पता चलेगा परमात्मा को, की फ़सल कैसे करते हैं ,बेकार ही इतने बरस हम किसानो को परेशान करते रहे.

फ़सल काटने का समय भी आया ,किसान बड़े गर्व से फ़सल काटने गया, लेकिन जैसे ही फसल काटने लगा ,एकदम से छाती पर हाथ रख कर बैठ गया!  गेहूं की एक भी बाली के अन्दर गेहूं नहीं था ,सारी बालियाँ अन्दर से खाली थी,  बड़ा दुखी होकर उसने परमात्मा से कहा ,प्रभु  ये  क्या हुआ ?

तब परमात्मा बोले,” ये तो होना ही था  ,तुमने पौधों  को संघर्ष का ज़रा  सा  भी मौका नहीं दिया . ना तेज  धूप में उनको तपने दिया , ना आंधी ओलों से जूझने दिया ,उनको  किसी प्रकार की चुनौती  का अहसास जरा भी नहीं होने दिया , इसीलिए सब पौधे खोखले रह गए, जब आंधी आती है, तेज बारिश होती है ओले गिरते हैं तब पोधा अपने बल से ही खड़ा रहता है, वो अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष करता है और इस संघर्ष से जो बल पैदा होता है वोही उसे शक्ति देता है ,उर्जा देता है, उसकी जीवटता को उभारता है.सोने को भी कुंदन बनने के लिए आग में तपने , हथौड़ी  से पिटने,गलने जैसी चुनोतियो से गुजरना पड़ता है तभी उसकी स्वर्णिम आभा उभरती है,उसे अनमोल बनाती है !”

उसी तरह जिंदगी में भी अगर संघर्ष ना हो ,चुनौती  ना हो तो आदमी खोखला  ही रह जाता है, उसके अन्दर कोई गुण नहीं आ पाता ! ये चुनोतियाँ  ही हैं जो आदमी रूपी तलवार को धार देती हैं ,उसे सशक्त और प्रखर बनाती हैं, अगर प्रतिभाशाली बनना है तो चुनोतियाँ  तो स्वीकार करनी ही पड़ेंगी, अन्यथा हम खोखले ही रह जायेंगे.  अगर जिंदगी में प्रखर बनना है,प्रतिभाशाली बनना है ,तो संघर्ष और चुनोतियो का सामना तो करना ही पड़ेगा !

सफलता की चाभी

By flipkart   Posted at  00:35   MOTIVATIONAL STORIES No comments


 सफलता की चाभी!!!!!!
Success एक ऐसा जादुई शब्द है जिसको हर इंसान अपनी ज़िन्दगी में हमेशा चाहता है। हमारी ज़िन्दगी इस Success शब्द के आगे-पीछे ऐसे नाच रही है कि हमें Success से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। हम जो भी कर रहे हैं, उसमे हमें Success हर हाल में चाहिए, लेकिन..........…… लेकिन इस Success को भोगने का सुख क्या हर किसी को मिल पाता है? "जिसे success मिलती है उसे ख़ुशी का ठिकाना नहीं मिलता और जिसे नहीं मिलती उसे ग़म का किनारा नहीं मिलता।"


सफलता के रहस्य को समझने के लिए अगर हम internet पर search करें तो यहाँ ढेरों article मिल जाएंगे, videos मिल जाएंगे और सैकड़ों books मिल जाएँगी। अगर हम life में successful होते चले जाएँ तो क्या हमें जरूरत पड़ेगी कि हम success पाने के तरीकों की खोज पर निकले??? शायद नहीं.......  लेकिन जब हम असफल हो रहे होते हैं तब हम books, motivational articles & videos में सफलता के रहस्य को खोजने लगते हैं। इनसे हमें बहुत सारे नियम पता चलते हैं, कुछ समय तक तो हम इन नियमों की पालना भी करते हैं लेकिन थोड़े दिनों बाद सबकुछ पहले जैसा.............. Books कहीं shelf  में, Article, Video दिमाग से बाहर।


क्या success का कोई formula बनाया जा सकता है, जिसको follow करके सभी लोग सफल हो जाएँ ? नहीं मुझे नहीं लगता success पाने का कोई एक formula बनाया जा सकता है। जिस तरह हर इंसान के लिए success के मायने अलग हैं उसी तरह success पाने के तरीके भी अलग होंगे। हाँ कुछ basic concept जरूर हैं जो सभी जगह लागू होंगे। इसलिए मैं अपने इस article में कोई नियम -क़ायदे नहीं बताना चाहता बल्कि एक बहुत जरूरी basic concept पर बात करूँगा। ये एक ऐसी कुंजी है जिसको अगर आपने जीवन में उतार लिया तो सफलता की राह पर चलना बहुत आसान हो जायेगा। सबसे पहले एक बात की गांठ बांध लें कि
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